
विदेशों की देखादेखी हिंदुस्तान में भी नब्बे के आखिरी दशक में 24 घंटे हिंदी खबरिया चैनलों की शुरूआत हुई. शुरूआत जैन ज़ी और स्टार(एनडीटीवी) के साथ हुई. और अपने शवाब पर चढ़ी आज तक के साथ. इसके बाद एनडीटीवी स्टार से अलग हुआ.स्टार का अपना और एनडीटीवी का अपना चैनल आया. इसी के साथ शुरू हुई चैनलों में टीआईपी की लड़ाई. इस जंग में चैनल की आईडी पहुंच गई क्राइम के मैदान से होते हुए श्मशान,शुरूआत ज़ी ने की. इसकी देखा देखी कई चैनल भूत के बाज़ार में उतर गए. इस बीच इंडिया टीवी और आईबीएन 7 भी मार्केट में आ गए. लड़ाई और मुश्किल हो गयी. टीआईपी में दशमलव की जंग शुरू हो गई.देखते ही देखते खबरों की दुनिया बदल गई.देश के हालात की बजाय सीरियल, रियेलिटी शो और कॉमेडी के शो दिखने लगे. शहर और गांव की तस्वीरों की जगह यू-ट्यूब के वीडियो नज़र आने लगे. इस ड्रामे से एक चैनल बचा हुआ था.एनडीटीवी.लेकिन अब उसमें भी खबरों की जगह टीवी शोज़ हावी रहते हैं. ज़ी और स्टार ज़रूर खबरों की दुनिया में लौट आए दिखते हैं.(न्यूज़ की पुरानी परिभाषा के मुताबिक) लेकिन टीआरपी के लिए उन्हें भी कुछ न कुछ खेला ज़रूर करना पड़ता है ) यानि चैनल वाले मान चुके हैं कि चैनल चलाए रखने के लिए नान न्यूज आइटम दिखाना पड़ेगा. शायद इसलिए अब किसी भी हिंदी चैनल पर चौबीस घंटे खबरें नहीं दिखतीं. अब सवाल उठता है कि क्या हिंदुस्तान में 24 घंटे न्यूज चैनल का कांस्टेप्ट असफल हो चुका है. आप क्या सोचते हैं.अपनी यहां टिप्पणी में दर्ज करें और इस बहस में भाग लें-
4 comments:
अब यूं पूरा पूरा दिन अनर्गल बोलेंगे तो कंसेप्ट क्या करेगा बेचारा
24 घंटे न्यूज के नाम पर अनाप शनाप दिखलाए जाने का क्या मतलब है ?
नई नौटंकी क्या हो रही है देखना हो तो न्यूज़ चैनल खोलिए :)
वीनस केसरी
इस तरह की नौटंकी को भी न्यूज़ कहते है????
ये न्यूज़ के नाम पर एक भद्दा मजाक है...
चेनलों के नाम बदल कर नौटंकी ही रख देना चाहिए....
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